Laws of refraction hindi प्रकाश का अपवर्तन(Refraction of Light):जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है तो वह अपने पथ से विचलित हो जाता है। प्रकाश के इस विचलन को प्रकाश का अपवर्तन कहा जाता है।
जैसे कि आप लोग देखिए, Laws of refraction hindi माना एक पहला माध्यम है और एक कोई दूसरा माध्यम है (जैसे कि चित्र में नीचे दर्शाया गया है) पहले माध्यम से प्रकाश की किरणें आ रही है जो आपतित किरण है, आपको पता है ये किरण जिस बिंदु से टच करेगी उसके परपेंडीकूलर एक लाइन जो ड्रॉ करेंगे वो एक नॉर्मल अभिलंब होगा। प्रकाश की किरणें जिस तरफ से आ रही है उसी के बिल्कुल सीधे जाना चाहिए था, लेकिन हम जानते है कि अगर प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है तो वो हल्की टेड़ी हो जाती है (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है) और इसी प्रक्रिया को हम प्रकाश का अपवर्तन Laws of refraction hindi कहते है।
उत्तल लेंस और अवतल लेंस में अंतर(Different Between Convex Lens & Concave Lens)
उत्तल लेंस(Convex Lens): इस प्रकार के लेंस में बीच का भाग मोटा और किनारे से पतला होता है।(जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।)अवतल लेंस(Concave Lens): अवतल लेंस उत्तल लेंस के ठीक उल्टा होता है, इस प्रकार के लेंस में बीच मे से पतला और किनारों से मोटा होता है।उत्तल लेंस और अवतल लेंस के कार्य(Working of Convex Lens & Concave Lens)अब आप आसानी से उत्तल लेंस और अवतल लेंस को देख कर समझ सकते है जैसा कि उपर्युक्त बताया गया। ये तो पहचाने वाली बात हो गई की आप देख के पहचान लेंगें। लेकिन अब इसके कार्य के बारे में जाने, क्योंकि इन दोनों लेंस के कार्य भी अलग अलग होंगे।उत्तल लेंस(Convex Lens): उत्तल लेंस, ये आनेवाली प्रकाश की किरणों को एक जगह अपसारित कर देता है । इसलिए इस लेंस को अपसारी लेंस भी कहा जाता है।नोट: उत्तल लेंस की फोकस दूरी हमेशा धनात्मक होती है।अवतल लेंस(Concave Lens): अवतल लेंस, ये आने वाली प्रकाश की किरणों को अभिसारित कर देता है।इसलिए अवतल लेंस को अभिसारी लेंस भी कहा जाता हैं।नोट: अपवर्तन जो होता है वो “लेंस” से होता है।प्रकाशीय केंद्र(Optical Centre)किसी भी लेंस के मध्य बिंदु को उस लेंस की प्रकाशीय केंद्र कहा जाता है।मुख्य अक्ष(Principle Axis)एक ऐसी क्षैतिज रेखा(Horizontal Line) जो प्रकाशीय केंद्र से होकर गुजरती है उसे उस लेंस का मुख्य अक्ष कहा जाता है। जिसे O से दर्शाया जाता हैं।
लेंस की फोकस(Focus of Lens)
हम जानते है कि उत्तल लेंस में प्रकाश की किरणें अपसरित हो जाती हैं। “जिस बिंदु पर सभी किरणें एक जगह अपसरित होती है, उस बिंदु को लेंस की फोकस कहते हैं।”नोट: फोकस दूरी हमेशा प्रकाशीय केंद्र से मापी जाती हैं।इसलिये फोकस(F) और प्रकाशीय केंद्र(O) के बीच की दूरी को फोकस -दूरी कहते हैं।
अवतल लेंस से अपवर्तन(Refraction of Concave Lens)
पहला नियम(First Low): प्रकाश की किरण जो मुख्य-अक्ष के समान्तर आपतित हो रही है अपवर्तन के बाद फोकस से गुजरती हुई प्रतीत होती है। जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है।दूसरा नियम(Secound Law): “फोकस की तरफ आती हुई प्रकाश किरण अपवर्तन के बाद मुख्य-अक्ष के समान्तर हो जाती है।”यानी जो प्रकाश की किरणें फोकस की तरफ से आती है तो वह अपवर्तन के पश्चात वह मुख्य-अक्ष के समान्तर(सीधा) हो जाती है। इस प्रक्रिया को नीचे चित्र में वर्णित किया गया है-तीसरा नियम(3rd Law): प्रकाशीय केंद्र(Optical Centre) से गुजरती हुई प्रकाश किरणों का विचलन नही होता है। अर्थात प्रकाश की किरणें सीधे निकल जाती है। जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है।
उत्तल लेंस से अपवर्तन(Refraction of Convex Lens)
पहला नियम(First Low): प्रकाश की किरण मुख्य-अक्ष के समान्तर यदि आपतित होती है तो अपवर्तन के बाद फोकस से होकर गुजरती हैं।जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है-दूसरा नियम(Secound Law): मुख्य-फोकस से होकर गुजरने वाली आपतित किरण अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समान्तर हो जाती जाती हैं। जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है-तीसरा नियम(3rd Law): प्रकाशीय केंद्र से गुजरने वाली आपतित किरण बिना विचलित हुए सीधे चल जाती हैं। जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है-निष्कर्ष(Conclusion): हम आशा करते है कि आज भौतिक विज्ञान के लेंस अपवर्तन के नियमों को पूरी फिगर द्वारा आपके सामने प्रदर्शित की गई है बिल्कुल समझ में आ गया होगा। ये ऐसे महत्वपूर्ण टॉपिक है जिससे कि रेलवे एग्जाम में 1 या 2 प्रश्न बार बार पूछे ही जा रहे है। इसलिए मैंने यहाँ लेंस अपवर्तन की पूरी थ्योरी को बताया है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक को पढ़ने या सरकारी नौकरी , एडमिट कार्ड , एग्जाम, एड्मिसन, सिलेबस एवं योजना से संबंधित जानकारी के लिए हमारी इस Sonujieducation.com पर विजिट जरूर करें। इस वेबसाइट को ज्यादा से ज्यादा दोस्तों को शेयर जरूर करें । धन्यवाद!